बिहार: जाति आधारित जनगणना – लालू यादव के पार्टी को मिला अधिकतम फायदा, अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या का पता

SHAHID RASMANA
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बिहार: जाति आधारित जनगणना- लालू यादव के पार्टी को मिला अधिकतम फायदा, अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या का पता

बिहार में हाल ही में हुई जाति आधारित जनगणना ने लालू यादव की पार्टी को बड़ा फायदा पहुंचाया है। इस लेख में, हम इस जनगणना के परिणामों के बारे में चर्चा करेंगे और जानेंगे कि अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या क्या है और इसके साथ ही बिहार के राजनीतिक मंच पर कैसा प्रभाव पड़ा।

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बिहार: जाति आधारित जनगणना- लालू यादव के पार्टी को मिला अधिकतम फायदा, अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या का पतालालू यादव के पार्टी को फायदाअत्यंत पिछड़े लोगजनगणना का महत्वसामाजिक और राजनीतिक प्रभावबिहार की नीतीश सरकार ने जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं: जनसंख्या के बड़े फैक्ट्स1. बिहार में कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है2. बिहार में 27% ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) की आबादी है3. राज्य में अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी 36% है4. बिहार में SC वर्ग की आबादी 19% है5. अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग की आबादी 1.68% है6. बिहार में अनारक्षित (जनरल) की तादाद 15.52% है7. ब्राह्मणों की आबादी 3.66 प्रतिशत है8. बिहार में भूमिहार की आबादी 2.86 फीसदी है. बिहार में यादवों की आबादी 14 फीसदी है9. बिहार में कुर्मी समुदाय की जनसंख्या 2.87 फीसदी है. मुसहर की आबादी 3 फीसदी है10. बिहार में राजपूतों की आबादी 3.45 फीसदी हैनिष्कर्षण

लालू यादव के पार्टी को फायदा

जनगणना के परिणामों के अनुसार, लालू यादव की पार्टी ने इससे सबसे अधिक फायदा उठाया है। अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या के आधार पर, इस पार्टी ने अपने चुनावी बेड़ियों को स्थापित किया है और अपने पूर्व क्षेत्रों में अधिक समर्थन प्राप्त किया है।

bihar caste census report by nitish kumar and lalu prasad yadav

अत्यंत पिछड़े लोग

जनगणना के इस परिणाम के अनुसार, बिहार में अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या काफी अधिक है। इसका मतलब है कि यह वर्ग बिहार के समाज में महत्वपूर्ण है और उनके हितों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जाने चाहिए।

जनगणना का महत्व

जनगणना एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो एक देश या राज्य की जनसंख्या को विस्तार से जानने के लिए की जाती है। इसके माध्यम से हम यह समझ सकते हैं कि विभिन्न समुदायों और वर्गों की संख्या क्या है और उनके साथ ही उनकी आर्थिक स्थिति क्या है। इससे सरकार को योजनाएँ बनाने और समाज की समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त होता है।

सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव

जनगणना के परिणाम आमतौर पर सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव डालते हैं। यह पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वे अपनी राजनीतिक रणनीतियों को बदल सकते हैं और अपने समर्थकों की आवश्यकताओं के अनुसार कदम उठा सकते हैं।

बिहार की नीतीश सरकार ने जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी कर दिए हैं: जनसंख्या के बड़े फैक्ट्स

बिहार, भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है जो अपनी बड़ी आबादी के साथ अपने सामाजिक और जातिगत संरचना के लिए जाना जाता है। नीतीश सरकार ने हाल ही में जातिगत जनगणना के आंकड़े जारी किए हैं, जो इस राज्य के जनसंख्या के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। इस लेख में, हम आपको बिहार जातिगत जनगणना के 10 बड़े फैक्ट्स के बारे में बताएंगे, जो इस राज्य के समाजिक संरचना को समझने में मदद करेंगे।

1. बिहार में कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है

बिहार भारत के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्यों में से एक है, और इसकी कुल आबादी 13 करोड़ 7 लाख 25 हजार 310 है। यह राज्य अपनी बड़ी आबादी के साथ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

2. बिहार में 27% ओबीसी (पिछड़ा वर्ग) की आबादी है

ओबीसी, जिन्हें पिछड़ा वर्ग भी कहा जाता है, बिहार की आबादी का लगभग 27% हिस्सा बनाते हैं। ये समुदाय समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें समाज में न्याय और समानता के साथ देखा जाता है।

3. राज्य में अत्यंत पिछड़ा वर्ग की आबादी 36% है

बिहार में अत्यंत पिछड़ा वर्ग, जिन्हें आर्टिकल 46 के तहत लिस्ट कास्ट में शामिल किया गया है, की आबादी लगभग 36% है। इस समुदाय के लोग अपने सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार करने के लिए कई प्रयास कर रहे हैं।

4. बिहार में SC वर्ग की आबादी 19% है

बिहार में अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग की आबादी लगभग 19% है। इस समुदाय के लोग भी समाज में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत कर रहे हैं और समाज में समानता की दिशा में कई कदम उठा रहे हैं।

5. अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग की आबादी 1.68% है

बिहार में अनुसूचित जनजाति यानी ST वर्ग की आबादी केवल 1.68% है। इस समुदाय के लोग अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संजीवनी बूटी के रूप में बचाने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

6. बिहार में अनारक्षित (जनरल) की तादाद 15.52% है

बिहार में अनारक्षित यानी जनरल की आबादी लगभग 15.52% है। यह समुदाय समाज में विभिन्न विभागों में अपनी जगह बना रहा है और विकास में योगदान कर रहा है।

7. ब्राह्मणों की आबादी 3.66 प्रतिशत है

ब्राह्मण समुदाय की आबादी बिहार में करीब 3.66 प्रतिशत है। यह समुदाय अपने सामाजिक और धार्मिक कार्यों में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

8. बिहार में भूमिहार की आबादी 2.86 फीसदी है. बिहार में यादवों की आबादी 14 फीसदी है

बिहार में भूमिहार समुदाय की आबादी लगभग 2.86% है, जबकि यादव समुदाय की आबादी 14% है। ये दोनों समुदाय समाज में अपनी विशेष पहचान बनाने में मदद कर रहे हैं।

9. बिहार में कुर्मी समुदाय की जनसंख्या 2.87 फीसदी है. मुसहर की आबादी 3 फीसदी है

कुर्मी समुदाय की आबादी बिहार में 2.87% है, जबकि मुसहर समुदाय की आबादी 3% है। इन समुदायों के लोग अपने उत्थान के लिए मेहनत कर रहे हैं और समाज में समानता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।

10. बिहार में राजपूतों की आबादी 3.45 फीसदी है

बिहार में राजपूत समुदाय की आबादी लगभग 3.45% है। ये समुदाय राजस्थान के राजपूतों के साथ मिलकर राज्य के सामाजिक संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

निष्कर्षण

बिहार में हुई जाति आधारित जनगणना ने सामाजिक और राजनीतिक मानचित्र को बदल दिया है। अत्यंत पिछड़े लोगों की संख्या के परिणामस्वरूप, वे अब अपने हकों के लिए ज़ोरदार तरीके से लड़ सकते हैं और सरकार को उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दबाव डाल सकते हैं। इससे बिहार की सामाजिक समृद्धि के पथ पर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।

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