विश्व के अधिकांश मुसलमान फ़िलिस्तीन का समर्थन क्यों करते हैं?

मस्जिद ए अक्सा और शाम की की अहमियत हरमैन की तरह है, जब कूरान पाक की ये आयत

फ़लिस्तीन नबियों का आवास और स्वर्गीय स्थल रही है:

 इस श्रेणी में यह बात सामान्य है कि फ़लिस्तीन कई पैगम्बरों का आवास था, और इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण और पवित्र स्थल माना जाता है।

इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र शहर के रूप में

मक्का और मदीना के बाद, यरूशलेम (मस्जिद-ए-अक्सा) इस्लाम का तीसरा सबसे पवित्र शहर माना जाता है, और मुस्लिम लोग इसे बड़े सम्मान से देखते हैं।

ऐतिहासिक संबंध

कई पैगम्बरों और नबियों के ऐतिहासिक संबंध फ़लिस्तीन से जुड़े हुए हैं, जैसे कि हज़रत इब्राहीम, हज़रत दाऊद, और हज़रत सुलेमान के साथ।

क़ुरआन में उल्लिखित होने के कारण

क़ुरआन में फ़लिस्तीन और यरूशलेम के बारे में कई आयात हैं, और ये आयात मुस्लिम लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

फ़लिस्तीन का इस्लामिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है, जैसे कि सलाहुद्दीन अय्यूबी के द्वारा इसका फिर से मुकद्दस बनाया जाना और इसके मुकद्दस स्थलों की सुरक्षा के लिए सहाबा किराम की सहायता।

इन सभी कारणों के साथ, फ़लिस्तीन का मुस्लिम समुदाय में बड़ा महत्व है और यह उनका एक महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।